
एकलव्य विश्वविद्यालय दमोह के आईक्यूएसी द्वारा शिक्षकों को सशक्त बनाने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका विषय पर तीन दिवसीय शिक्षक विकास कार्यक्रम(एफडीपी) का शुभारंभ 18 सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय सभागार में हुआ।
यह कार्यक्रम अलग-अलग सत्रों में 20 सितंबर 2025 तक आयोजित किया जाना है। शिक्षक विकास कार्यक्रम का आयोजन एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह की कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया, प्रति कुलाधिपति श्रीमती पूजा मलैया एवं श्रीमती रति मलैया के कुशल नेतृत्व, कुलगुरू प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार जैन, कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार जैन, कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा, अधिष्ठाता अकादमिक डॉ. शमा खानम के साथ ही शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दमोह से पधारे विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर रश्मि जेता की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस के प्रथम सत्र में प्रमुख वक्ता के रूप में प्रोफेसर रश्मि जेता द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 तथा भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर अपना वक्तव्य दिया।
प्रोफेसर जेता ने बताया कि प्राचीन काल से लेकर आज तक शिक्षा व्यवस्था में समय समय पर परिवर्तन होता आया है। वर्तमान में आवश्यकता है भरतीय ज्ञान परंपरा आधारित पाठ्यक्रम निर्माण की, जिससे आने वाली पीढ़ी अपने पूर्वजों के ज्ञान को संचित कर सके साथ ही उसके व्यावहारिक उपयोगिता को समझ सके। द्वितीय सत्र में डॉ.आशीष जैन, संस्कृत विभागाध्यक्ष द्वारा संस्कृत साहित्य में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा विषय अपना व्याख्यान दिया तथा सभी श्रोताओं का ज्ञानवर्धन किया। डॉ. जैन ने बताया कि हमारे ऋषि मुनियों ने शिक्षा का जो रूप दिया आज उसे उसी रूप में प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। हमारे समस्त पौराणिक ग्रंथों में प्रत्येक विषयों से संबंधित ज्ञानकोश भरा है, जरूरत है उसे आज की शिक्षा व्यवस्था में विषयानुरूप पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की। इस अवसर पर कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. सुदेश बाला जैन एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. तनवीर खान, डॉ. गीता कुमारी जे, डॉ. दुर्गा महोबिया, डॉ. रागिनी भार्गव के साथ ही सभी संकाय के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों की उपस्थिति रही।






